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भाई की मार और मां की बेरुखी से तंग आकर श्रावस्ती से लखनऊ पहुंची युवती का सहारा बना इंद्रावती निर्भयम फाउंडेशन

लखनऊ: भाई की मारपीट और मां की बेरुखी से आहत होकर श्रावस्ती जनपद से लखनऊ पहुंची एक युवती को इंद्रावती निर्भयम फाउंडेशन ने समय रहते सहारा देकर मानवीयता की मिसाल पेश की। युवती रविवार को लखनऊ पहुंची थी, जहां असहाय स्थिति में उसकी जानकारी सामाजिक माध्यमों से फाउंडेशन तक पहुंची।

सूचना मिलते ही इंद्रावती निर्भयम फाउंडेशन के निदेशक विश्वामित्र पांडेय (अधिवक्ता) के निर्देशन में फाउंडेशन की टीम सक्रिय हुई। फाउंडेशन द्वारा संचालित महिला अधिकार संरक्षण इकाई के प्रभारी श्री सुंदरलाल शर्मा द्वारा युवती के लिए नए कपड़े, ठंड के वस्त्र, भोजन एवं सुरक्षित रूप से रहने की समुचित व्यवस्था कराई गई। साथ ही युवती को मानसिक संबल देते हुए भरोसा दिलाया गया कि वह अकेली नहीं है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए फाउंडेशन ने श्रावस्ती के जन प्रतिनिधियों एवं सक्षम अधिकारियों से संपर्क कर युवती के पिता द्वारिका, निवासी नारायणपुर मोहम्मदपुर राजा, इकौना, जिला श्रावस्ती को पूरे प्रकरण की जानकारी दी। इसके बाद सोमवार को पिता को लखनऊ बुलाया गया।
फाउंडेशन की मौजूदगी में पिता और पुत्री की मुलाकात कराई गई। भावुक माहौल में पिता ने अपनी पुत्री को समझा-बुझाकर साथ ले जाने की सहमति दी और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न होने का आश्वासन दिया। फाउंडेशन द्वारा पिता-पुत्री को नए कपड़े, ठंड के वस्त्र एवं आने-जाने का किराया उपलब्ध कराकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया।

मंगलवार को युवती अपने पिता के साथ सुरक्षित रूप से वापस श्रावस्ती रवाना हुई। इस दौरान पिता ने इंद्रावती निर्भयम फाउंडेशन की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था के सहयोग से उनकी पुत्री सुरक्षित और सम्मान के साथ घर लौट सकी।

पिता-पुत्री के मिलन के क्षण भावुक रहे और वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय सहयोग का जीवंत उदाहरण बन गया।

इंद्रावती निर्भयम फाउंडेशन का यह प्रयास एक बार फिर साबित करता है कि संकट में फंसी महिलाओं के लिए संस्था न केवल सहारा बनती है, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और विश्वास के साथ नया मार्ग भी दिखाती है।

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