लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर स्कूलों में कार्यरत अनुदेशकों को बड़ी राहत मिली है। अब उनकी सेवाएं समाप्त नहीं की जाएंगी और उन्हें 17 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि संविदा की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी अनुदेशकों की नौकरी स्वतः समाप्त नहीं होती। न्यायालय ने माना कि अनुदेशक पिछले दस वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में यह पद स्वतः सृजित (ऑटोमैटिकली क्रिएटेड) माना जाएगा।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अनुदेशकों/शिक्षकों को 17 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाए। इससे पहले राज्य सरकार ने मानदेय बढ़ाने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
इस फैसले से प्रदेश के हजारों अनुदेशकों को स्थायित्व और आर्थिक सुरक्षा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।



