श्रेया मेहरोत्रा: लखनऊ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Mayawati ने समाजवादी पार्टी पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि उनकी सरकार के दौरान शुरू किए गए कई अहम विकास कार्य आज तक अधूरे पड़े हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर यूपी की सियासत में पुराने कामों और दावों को लेकर बहस छेड़ दी है।
मायावती ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की नींव उनके शासन में रखी गई थी और अगर उस समय केंद्र स्तर पर रुकावटें न आतीं, तो ये काम काफी पहले पूरे हो सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने सिर्फ योजनाएं नहीं बनाईं, बल्कि जमीन पर काम शुरू कराए थे, जिनका उद्देश्य राज्य में विकास को नई दिशा देना था।
उन्होंने समाजवादी पार्टी की सरकार पर आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। उनके अनुसार, जिन कामों को गति मिलनी चाहिए थी, वे बीच में ही रुक गए और उनका लाभ जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंच सका।
मायावती ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में बनाए गए संस्थान, जिलों के नाम और अन्य निर्माण कार्य समाज के विभिन्न वर्गों को सम्मान देने के लिए किए गए थे। उनका मानना है कि यह सिर्फ विकास नहीं था, बल्कि सामाजिक पहचान और सम्मान से जुड़ा एक बड़ा कदम था।
अपने बयान के जरिए उन्होंने जनता से अपील की कि वे राजनीतिक वादों के बजाय काम के आधार पर निर्णय लें और यह देखें कि किस सरकार ने वास्तव में जमीन पर बदलाव लाने की कोशिश की।
यूपी की राजनीति में यह बयान ऐसे समय आया है, जब आने वाले चुनावों को लेकर माहौल धीरे-धीरे बन रहा है। ऐसे में नेताओं के बयान और दावे अब सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक रणनीति का हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं, जो सीधे जनता के भरोसे को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।



